तेरी जरुरत

वो तेरी हँसी ,वो तेरी मोह्हबत।

वो तेरी जुल्फों की ठंडक ,

लेकर जाती मेरी दिल की गर्मी।।

वो तेरा हुस्न खूबसूरते ताज सा,

वो मेरा नादाँन दिल बेताब सा।

हो सकता तेरे से प्यार मुझे,

इस जहाँ में भक्त करता पूजा जैसे।।

न तू डरना इस जालिम दुनिया से ,

मोह्हबत भी एक इबादद है।।

खुदा भी खुद हार जाता प्यार के एक वार से।।

अमित तू एक वजह है,

मोह्हबत की पूजा को ज़िंदा रखने के लिए ।

मोह्हबत ही काफी है इस जालिम दुनिया से लड़ने के लिए ।।