एक चिट्ठी बेटी के नाम

झूठी कसम नहीं खानी चाहिए, और अगर खानी भी पड़े तो सबसे सेफ भगवान की कसम होती है ! हिंदी में बहुत से राइटर हुए, कुछ ने नाम कमाया तो कुछ बस नाम के राइटर रह गए, इसी बीच नाम आता है दिव्य प्रकाश दुबे जी का जिन्होंने “टर्म्स एंड कंडीशन्स अप्लाई” और “मसाला चाय” नाम से २ किताब लिखी है, साथ ही इनके फेसबुक पोस्ट्स में खास तरीके के खत दिख जायेंगे, वो खत जो एक बाप / बेटा / पति / प्रेमी कि दिल की अनकही बात होती है जो वो इसलिए लिख के रखते है कि क्या पता किसी को भेजने की जरूरत पड़ जाये। पेश है इस लेखक का एक पत्र !

प्रिय बेटी,

तुम्हें चिट्ठी लिखते हुए एक अजीब सी घबराहट हो रही है। लग रहा है तुमसे पहली बार कोई बात करने जा रहा हूँ। नहीं नहीं इसलिए नहीं कि मेरे पास लिखने के लिए बातें नहीं है । बल्कि इसलिए कि इतनी बातें हैं कि समझ नहीं आ रहा कि आखिर शुरू कहाँ से करूँ। सबकुछ माँ पर छोड़कर हम शायद भूल ही गए हैं कि एक बाप और बेटी सीधे भी बात कर सकते हैं।

वो कहते हैं न कि बाप के जूते जब बेटे के पैर में आने लगे तो रिश्ता बाप-बेटे का नहीं रहता दोस्त का हो जाता है। पता नहीं ऐसा कुछ कभी किसी ने बेटी के लिए क्यूँ नहीं कहा। शायद इसलिए क्यूंकी लड़कों को तो जूते के साइज़ बराबर बड़ा होने में सालों लग जाते हैं। लेकिन लड़कियां उसी दिन से पापा की दोस्त हो जाती हैं जिस दिन वो अपनी तुतलाती आवाज़ में पहली बार मम्मी की सब शिकायतें करती हैं।

जब तुम पहली बार हॉस्टल जा रही थी और तुम्हारी माँ बार बार तुमको बोल रही थी कि बेटी घर की इज्ज़त तुम्हारे हाथ में है कोई ऐसी वैसी बात मत करना, पढ़ने जा रही हो बस मन लगाकर पढ़ना। पता नहीं तुमने माँ की कितनी बात मानी।  मान ली तो अच्छा आखिरी बात माँ ने कही थी नहीं भी मानी तो और भी अच्छा क्यूंकी लड़की के बॉयफ्रेंड और घर की इज्ज़त के बीच न कोई रिश्ता कभी हुआ करता था न होता है और न ही होगा।

सही से पढ़ाई करना, खाना टाइम से खा लेना, ऑफिस में मन लगाकर काम करना ये सब बातें इतनी बोरिंग हैं कि बोलने का मन नहीं करता। मुझे मालूम है ये सब तुम अपने आप manage कर लोगी। बेटी कुछ भी करना लाइफ में, बनाना चाहे बिगाड़ना शादी करना या नहीं करना फ़र्क नहीं पड़ता लेकिन याद रखना मैं कभी अखबार में, मैट्रीमोनी वेबसाइट में तुम्हारी शादी का ऍड नहीं देने वाला। सारी पढ़ाई लिखाई और समझदारी सीखने के बाद भी अगर शादी के लिए तुम हमपर dependent हो तो समझो सब सीखना बेकार ही हो गया।

बस कभी अपनी माँ जैसी मत बनना, अगर कभी बनना ही पड़े तो अपनी बेटी जैसी बनना। क्यूंकी बेटी आने वाला कल की माँ होती है और माँ बीते हुए कल की बेटी। उम्मीद है कि आगे भी चिट्ठी लिखता रहूँगा। जब बात शुरू हो ही गयी है तो रुकनी नहीं चाहिए।

पापा

~ हरिशंकर देवांगन की दुनियादारी

“सौरव चण्डीदास गांगुली”, दी मैन हु चेंज्ड इंडियन क्रिकेट

“सौरव चण्डीदास गांगुली”, दी मैन हु चेंज्ड इंडियन क्रिकेट

पहली बार विदेशी कोच लाया गया, युवा टीम बनाने पर जोर दिया गया और उस युवा टीम को मिला एक युवा कप्तान, वो पुर्व विश्व विजेता टीम जो दुसरो को हराने और खुद जीतने का खुब्बत रखती है उसे उस खुब्बत से भी बड़ा बनाने के लिए उसने जो कदम उठाये उसके कारण उसे ‘दादा’ कहा जाने लगा । दादागिरी भी ऐसी के माशाअल्लाह राहुल द्रविड़ नाम के लड़के को 7 वे बैट्समैन-विकेट कीपर बनवाने के लिए भीड़ गया, वीरेन्द्र सहवाग से ओपनिंग करवा डाली, अनिल कुंबले को सबसे तगड़ी टीम का सबसे बड़ा स्पिनर बनाया और जिसकी टीम में क्रिकेट के भगवान खेले !

 

वो दौर जब भारतीय क्रिकेट मैच फिक्सिंग के कलंक से जूझ रहा था उस दौर में अपने कप्तानी करियर की शुरुआत की ! दादा पर एक बुकी ने यहाँ तक कह डाला कि ”

No one had the guts to approach Sourav Ganguly for match-fixing”

 

jfxjstक्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स में डेब्यू किया, वर्ल्डकप के नॉकऑउट में शतक मारने वाले पहले बल्लेबाज बने, नेटवेस्ट सीरीज के फाइनल में शर्ट उतार के लहराया और गर्दा उड़ा दिए , सचिन के साथ रिकॉर्ड ओपेनिंग साझेदारियां की वो भी टेक्निकल कारण से क्रिटिक्स के निशाने में रहने के बाद भी !

 

क्रिकेट में धोनी और गांगुली की तुलना होती रहेगी पर ये बात सौ टका सच है कि सौरव ने हमें लड़ना सिखाया, विश्व विजेता टीम बनायीं और धोनी ने उसपे सफलता दिलाई ! श्री श्री 1983 कपिल देव लिखते है कि “it was due to Ganguly that India won the 2011 ICC World Cup” । ये कहना सही होगा कि गांगुली बेस्ट इंडियन क्रिकेट कैप्टन थे और धोनी बेस्ट इंडियन क्रिकेट टीम के ।

 

The Comeback King, The God of Off-Side और The Prince of Kolkata वो लफ्ज़ है जो सिर्फ एक शख्श नहीं शख्शियत को बताते है और CURYLOG मोहल्ला इस शख्श को सलाम ठोकता है !

 

~ हरिशंकर देवांगन की दुनियादारी 

सोनम गुप्ता, बेवफाई और दुनियादारी

आज कल देश में बस दो ही नाम सुनाई दे रहे है, “नरेंद्र मोदी” और “सोनम गुप्ता”, नोटबंदी के इस मौसम में एक ने खूब रुलाया है और दूसरी ने खूब हंसाया है, बैंक और एटीएम की लाइन में घंटो लगे लोग जब कुछ नहीं होता तो अपने मोबाइल में इनके पोस्ट देख कर ही टाइमपास कर रहे है!

14980758_1266118016765523_9040683860876412920_nसोनम गुप्ता ने अपनी बेवफाई के जरिये मानो “एंजल प्रिया” को रिप्लेस ही कर दिया है ! भाई बेवफाई है ही ऐसा इंटरेस्टिंग कॉन्सेप्ट क्योकि इसमें आप बेवफा हैं या नहीं ये तय करने का हक़ आपको नहीं होता ! कोई आपको कह देता है और हो जाते हो,, हाँ अगर किस्मत और ज्यादा ख़राब हुई तो नोट, सुलभ शौचालयों और ट्रैन के डिब्बो में भी आपका नाम आ सकता है ! अब लेटेस्ट वाला ही एग्जाम्पल ले लो, पता नहीं देश के किस कोने में किसी सोनू , पप्पू , छोटू , अकरम , जोनी , पिन्टू , साहिद के साथ साहिबा ने बेवफाई की और अपना नाम देश ही नहीं विदेशी नोटों में छपवा कर अमर करवा लिया !
दिव्य प्रकाश दुबे जी लिखते है कि “तुम शादी से पहले सिर्फ़ और सिर्फ़ सोनम थी, गुप्ता तो तुम  गुप्ता जनरल स्टोर वाले के लौंडे से शादी करके हुई थी।” ये लॉजिक भी प्रैक्टिकली सही है पर वो प्यार, प्यार नहीं  बेवफाई था !
सोनम गुप्ता की बेवफाई मानों देश के मर्दों को एक ऐसी कॉमन बेवफाई के प्रति एकजुट कर रही हो, जो लड़कियां करती ही करती हैं. लड़कों को सोनम गुप्ता में या तो अपनी एक्स नजर आ रही है, या वो लड़की जिसने कभी उनकी प्यार भरी कोशिशों का जवाब नहीं दिया !
मुझे दुःख जरूर होगा, पर यकीन मानिए, हैरत नहीं होगी अगर कल न्यूज़ में सुनने को मिले कि फलां शहर में रहने वाली सोनम गुप्ता नाम की लड़की ने सुसाइड कर लिया है, क्योंकि सब उसे बेवफा-बेवफा कहकर परेशान करते थे !

लेख साभार :- प्रतीक्षा पीपी , ‘द लल्लनटॉप’ वाली

pic courtesy :- AIB (All India Bakchod)